प्रश्नोत्तर (FAQ)

प्रायः पूछे जाने वाले कुछ प्रश्न एवं उनके उत्तर। कोई और जिज्ञासा हो तो नीचे दिए संपर्क पर अवश्य पूछें।

मध्यस्थ दर्शन क्या है?

मध्यस्थ दर्शन — जिसे जीवन विद्या भी कहा जाता है — अस्तित्व की सच्चाईयों को समझने का एक सुगम रास्ता है। यह मानव चेतना के विकास की एक सहज प्रक्रिया है, जो अनुभव के आधार पर जीने की कला सिखाती है। विस्तार से पढ़ें — हमारे बारे में।

इसके प्रणेता कौन हैं?

मध्यस्थ दर्शन का प्रतिपादन श्रद्धेय ए. नागराज जी ने किया है। उनका संक्षिप्त परिचय यहाँ पढ़ें — दर्शन के प्रणेता के बारे में।

क्या यह किसी मत, सम्प्रदाय या वाद से जुड़ा है?

नहीं। यह किसी मत, सम्प्रदाय या वाद से परे है। इसमें हर बात को स्वयं के अनुभव की कसौटी पर परखने का आग्रह है — केवल मानने का नहीं, जानने का।

शिविर में क्या होता है?

शांत, प्राकृतिक परिवेश में सरल जीवन एवं संवाद; रटने के बजाय स्वयं के अनुभव से समझ का विकास; जीवन के हर प्रश्न पर निःसंकोच चर्चा; तथा स्वयं से परिवार और समाज तक — समाधान की दिशा।

कौन सम्मिलित हो सकता है?

हर आयु एवं पृष्ठभूमि के लोग। परिचय शिविर सभी हेतु है, युवा कार्यक्रम युवाओं हेतु तथा बाल कार्यक्रम बच्चों हेतु। सभी कार्यक्रम देखें — कार्यक्रम।

आरम्भ कहाँ से करें?

परिचय शिविर से — इसमें मध्यस्थ दर्शन का प्रारंभिक एवं सहज परिचय मिलता है। इसके बाद अध्ययन, अभ्यास एवं संवाद के सत्रों में जुड़ा जा सकता है।

आगामी शिविर कब और कहाँ हैं?

आगामी तिथियाँ कैलेंडर पृष्ठ पर देखें। वहीं से किसी भी कार्यक्रम को अपने Google Calendar में भी जोड़ा जा सकता है।

अध्ययन सामग्री कहाँ मिलेगी?

शिविरों की प्रस्तुतियाँ एवं अन्य पाठ्य-सामग्री सामग्री पृष्ठ से निःशुल्क डाउनलोड की जा सकती हैं। शिविरों व संवादों की रिकॉर्डिंग वीडियो पृष्ठ पर तथा ऑडियो ऑडियो पृष्ठ पर मिलेंगे।

क्या इस सामग्री का उपयोग या पुनः प्रकाशन किया जा सकता है?

हाँ। यह समूह "ज्ञान हर मानव तक सुगमता से पहुँचे" — इस सिद्धांत में भरोसा रखता है, अतः इसका कोई कॉपीराइट नहीं है। इसे आधार बनाकर अन्य सामग्री विकसित करने वालों से भी इसी की अपेक्षा है।

संपर्क कैसे करें?

पृष्ठ के सबसे नीचे "संपर्क" में दिए दूरभाष क्रमांक अथवा ईमेल पर निःसंकोच संपर्क करें।