परिचय शिविर
सभी हेतुमध्यस्थ दर्शन का प्रारंभिक एवं सहज परिचय — आरम्भ यहीं से।
मध्यस्थ दर्शन (सह-अस्तित्ववाद) श्रद्धेय ए. नागराज जी द्वारा प्रतिपादित एक मौलिक प्रस्ताव है, जो मानव को समझने और सुख-समृद्धि पूर्वक जीने का मार्ग प्रस्तुत करता है। परिचय शिविर इस दर्शन से पहली बार जुड़ने का सहज माध्यम है, जहाँ जीवन की मूलभूत बातों को सरल संवाद के रूप में साझा किया जाता है। यहाँ कुछ भी मानने का आग्रह नहीं है — जो भी कहा जाता है, वह एक प्रस्ताव है, जिसे आप अपनी सहज स्वीकृति के आधार पर जाँच सकते हैं और जीकर देख सकते हैं।
यह शिविर किसके लिए है
- जो अपनी ज़िंदगी को बेहतर बनाना चाहते हैं और सुख की निरंतरता की खोज में हैं
- जो परिवार में विश्वास, सम्मान और स्नेह पूर्ण संबंध जीना चाहते हैं
- जो समाज की समस्याओं के मूल कारण को समझना चाहते हैं
- जो बिना जाँची-परखी मान्यताओं के स्थान पर वास्तविकताओं की ठीक-ठीक समझ चाहते हैं
शिविर में क्या होता है
शिविर में मानव के जीने के चारों स्तरों — स्वयं, परिवार, समाज और प्रकृति/अस्तित्व — पर व्यवस्था को समझने का प्रस्ताव क्रमबद्ध रूप से रखा जाता है। हर बात को अपनी सहज स्वीकृति के आधार पर जाँचने और जीकर परखने के लिए आमंत्रित किया जाता है। संवाद, चर्चा और स्वयं के निरीक्षण के माध्यम से समझ को अपने जीने से जोड़ने का अभ्यास कराया जाता है। शिविर के अंत में आगे के अध्ययन-अभ्यास की योजना भी साझा की जाती है, ताकि यह समझ दैनिक जीवन का हिस्सा बन सके।
मुख्य विषय
- मानव की मूल चाहना — सुख और समृद्धि, निरंतर; तथा सुख-दुख की स्पष्ट पहचान
- मानव का अध्ययन — मैं (जीवन) और शरीर का सह-अस्तित्व; इच्छा, विचार, आशा की क्रियाएँ
- समृद्धि — आवश्यकता की पहचान और आवश्यकता से अधिक सुविधा का उत्पादन एवं सदुपयोग
- परिवार में व्यवस्था — संबंधों की पहचान तथा विश्वास, सम्मान, स्नेह, ममता, वात्सल्य, कृतज्ञता, गौरव, श्रद्धा और प्रेम — इन नौ भावों का निर्वाह
- संवाद की कला — सुनने और अपनी बात कहने का सहज तरीका
- समाज में व्यवस्था — समाधान, समृद्धि, अभय, सह-अस्तित्व रूपी मानव लक्ष्य
- प्रकृति एवं अस्तित्व में व्यवस्था — चार अवस्थाओं (पदार्थ, प्राण, जीव, ज्ञान) में परस्पर पूरकता तथा सह-अस्तित्व की समझ
शिविर से क्या मिलता है
- स्वयं को, अपनी चाहनाओं को और अपने भावों को समझने की एक स्पष्ट दृष्टि
- संबंधों में होने वाली सामान्य चूकों की पहचान और उन्हें सुधारने की दिशा
- समस्या के स्थान पर समाधान के अर्थ में सोचने का अभ्यास
- परिवार और समाज में सार्थक भागीदारी की प्रेरणा
- दैनिक अध्ययन-अभ्यास की एक व्यावहारिक योजना, जिससे समझ जीने में उतरती जाए
यह शिविर किसी निष्कर्ष को थोपता नहीं, बल्कि आपको स्वयं जाँचने, समझने और जीकर देखने का अवसर देता है। आप सादर आमंत्रित हैं।
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