पुस्तक वाचन (स्वाध्याय)

साहित्य का सामूहिक वाचन, मनन एवं चर्चा।

मध्यस्थ दर्शन का वांग्मय — दर्शन, वाद एवं शास्त्र — श्रद्धेय ए. नागराज जी की मूल पुस्तकों के रूप में उपलब्ध है। पुस्तक वाचन (स्वाध्याय) इन ग्रंथों का सामूहिक, नियमित अध्ययन है।

स्वाध्याय में क्या होता है

  • मूल ग्रंथों का क्रमबद्ध सामूहिक वाचन
  • कठिन स्थलों पर रुककर अर्थ एवं परिभाषाओं पर चर्चा
  • पढ़े हुए को अपने जीवन से जोड़कर मनन
  • नियमित बैठकों से अध्ययन की निरंतरता

किसके लिए है

जो मध्यस्थ दर्शन को उसके मूल स्रोत से — प्रणेता के अपने शब्दों में — समझना चाहते हैं। नए पाठक भी सम्मिलित हो सकते हैं; वाचन समूह साथ लेकर चलता है।

क्या मिलता है

  • मूल वांग्मय से सीधा परिचय — परिभाषाओं एवं प्रस्तावों की प्रामाणिक समझ
  • सामूहिकता से अध्ययन में नियमितता एवं गहराई
  • शंकाओं का समाधान एवं सह-अध्येताओं का साथ

संबंधित वीडियो

मानव व्यवहार दर्शन — अध्याय १ (पुस्तक अध्ययन)

मानव व्यवहार दर्शन — अध्याय २ (पुस्तक अध्ययन)